Sunday, April 25, 2010

जाटों आपको यह जान कर आश्चर्य होगा

जब यादव और गूजर जो हमारे तरह ही खेती करते थे उन्हें १९९० में आरक्षण मिल गया फिर हमें क्यों नहीं? आपको यह जान कर आश्चर्य होगा के जो कमेटी(१९७८) जातिओ का विश्लेषण कर रही थी उनमे सभी जातियों के सांसद थे सिर्फ जाट सांसद नहीं थे| क्यों? आप सभी जानते हे उत्तर प्रदेश में चौधरी चरण सिंह के ख़ास मुख्यमंत्री रामनरेश यादव थे और चौधरी चरण सिंह खुद उत्तर प्रदेश के गृह मंत्री थे फिर भी उत्तर प्रदेश से हर जाति का सांसद इस आरक्षण कमिटी में था सिर्फ जाटों को छोड़ कर | क्यों?
आपको यह जान कर आश्चर्य होगा जिन गाव में जाटों का आर्थिक और सामाजिक स्थिति का डाटा लिया गया वहां जाट जाति का एक भी आदमी नहीं रहा | हमारे तब के और अब के जाट नेताओं ने इसके बारे में आवाज क्यों नहीं उठाई? यह जानते हुए के हम आज भी और उस समय भी जनसख्या का ९५% खेती पर निर्भर करते है| फिर भी हमारे उत्तर प्रदेश के जाट नेताओं ने यह बात क्यों दबा कर रखी? क्या वो जानभूज कर हमें कमजोर रखना चाहते है? आज आर्थिक रूप से जाट यादव और गुजर से काफी पीछे रह गए हैं और अगर यही हाल रहा तो आने वाले टाइम में स्थिति और भी ख़राब होना निश्चित हैं| क्या कारण है की इस मुद्दे को आज तक इन जाट नेताओं ने कभी संसद में नहीं उठाया? उन्होने कभी भी यह सवाल नहीं किया?